Wish You Very Very Happy "Diwali"
शंकित मन की, नीरसता को, आई मिटाने, ’’दीपमालिका’’।
भटके राही, रोशन करने, आई घर-घर, ’’दीपमालिका’’।।
अंधकार की छाती चीरे, ये, नन्हा सा दीपक प्यारा।
संघर्षों की, सीखे देते, बीते उसका, जीवन सारा।।
मानव को, नवजीवन देने, आई घर-घर, ’’दीपमालिका’’।।
विजयगान ये, विजय पताका, सत्य, और प्रशंसा का।
प्रणवीरों की, रही साक्षी, गीत बने, अभिसंशा का।।
कर्म प्रधान है।, यही बताने, आई घर-घर, ’’दीपमालिका’’।।
दीप उजाला, भरे चेतना, हर के, मन की पीढा को।
फुलझडियॉ और पटाखे, दर्शाते जीवन क्रीडा को।।
कर्तव्य का, शंख फूॅकने, आई घर-घर, ’’दीपमालिका’’।।
अज्ञानी बन क्या सोने का, क्या ? मानस तुमने बना लिया ।
लक्ष्मण रेखा, लॉघ के कबसे ? शत्रु घर में, आ ही गया।।
मानव को आव्हान करने, आई घर-घर, ’’दीपमालिका’’।।
लाखो रुपये, अग्नि के संग, फट्ट फटाफट, जल जाते हैं।
महापुरुषों की, पुण्य धरा पर, लाखों भूखे, सो, जाते है।।
स्वार्थों की चकाचौंध में, सिमट गई हैं, ’’दीपमालिका’’।।
शंकित मन की, नीरसता को, आई मिटाने, ’’दीपमालिका’’।
भटके राही, रोशन करने, आई घर-घर, ’’दीपमालिका’’।।
अंधकार की छाती चीरे, ये, नन्हा सा दीपक प्यारा।
संघर्षों की, सीखे देते, बीते उसका, जीवन सारा।।
मानव को, नवजीवन देने, आई घर-घर, ’’दीपमालिका’’।।
विजयगान ये, विजय पताका, सत्य, और प्रशंसा का।
प्रणवीरों की, रही साक्षी, गीत बने, अभिसंशा का।।
कर्म प्रधान है।, यही बताने, आई घर-घर, ’’दीपमालिका’’।।
दीप उजाला, भरे चेतना, हर के, मन की पीढा को।
फुलझडियॉ और पटाखे, दर्शाते जीवन क्रीडा को।।
कर्तव्य का, शंख फूॅकने, आई घर-घर, ’’दीपमालिका’’।।
अज्ञानी बन क्या सोने का, क्या ? मानस तुमने बना लिया ।
लक्ष्मण रेखा, लॉघ के कबसे ? शत्रु घर में, आ ही गया।।
मानव को आव्हान करने, आई घर-घर, ’’दीपमालिका’’।।
लाखो रुपये, अग्नि के संग, फट्ट फटाफट, जल जाते हैं।
महापुरुषों की, पुण्य धरा पर, लाखों भूखे, सो, जाते है।।
स्वार्थों की चकाचौंध में, सिमट गई हैं, ’’दीपमालिका’’।।
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